Cyber Crime: लखनऊ के अलीगंज पुलिस ने कपूरथला पुलिस चौकी के पास रिध्या पैलेस में संचालित ठगी के अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर से गिरफ्तार 16 ठगों को जेल भेज दिया। ठगों से पूछताछ में पुलिस को पता चला कि मई से कॉल सेंटर संचालित था। गिरोह ने चार महीने में करीब पांच हजार अमेरिकन से 100 करोड़ से अधिक की ठगी की। गिरोह के फरार लखनऊ सेंटर हेड प्रियांशु उर्फ शिवा की तलाश में दबिश दे रही हैं। गिरफ्तार आरोपियों में 12 पुरुष और चार महिलाएं हैं। टेलीग्राम एप से होती थी भर्तियां अमेरिकन से 100 करोड़ से अधिक की ठगने वाले गिरोह में जालसाजों की भर्तियां टेलीग्राम एप के माध्यम से होती थी। काल सेंटर का हेड प्रियांशु उर्फ शिवा जालसाजों की भर्ती करने के लिए टेलीग्राम एप पर प्रचार प्रसार कर लोगों से संपर्क करता था। इसके बाद उनका ऑनलाइन इंटरव्यू होता था। फिर लखनऊ बुलाकर उन्हें 15 से 20 दिन का प्रशिक्षण दिया जाता था। जालसाजों की भर्ती पर अंतिम मुहर अहमदाबाद में बैठा मास्टरमाइंड लगाता था। वह प्रशिक्षण के बाद वीडियो काल पर साक्षात्कार लेता था। भर्ती के बाद रटाई जाती थी स्क्रिप्ट प्रशिक्षण के दौरान सभी को ठगी की स्क्रिप्ट रट्टा मार कर याद कराई जाती थी। यह सनसनीखेज खुलासा जेल भेजे गए 16 जालसाजों ने पुलिस की पूछताछ में किया। पकड़े गए जालसाजों ने पुलिस को बताया कि में बीटेक, एमबीए, स्नातक 12वीं और कुछ 10वीं पास है। उन्हें 25 से 30 हजार रुपये महीना वेतन दिया था। उनके रहने और खाने का बंदोबस्त सेंटर हेड कराता था। रात में खाने की व्यवस्था सेंटर पर ही थी। यहां ऑनलाइन डिलीवरी एजेंसियों से खाने के लिए मंगाया जाता था। अमेरिकन ड्यूटी ऑवर्स में काल सेंटर में काम होता था। अहमदाबाद से लखनऊ आती थी रकम इंस्पेक्टर अलीगंज ध्रुव कुमार के मुताबिक गिरोह के लोग हवाला के जरिए अमेरिका से रकम मंगाते थे। रकम पहले अहमदाबाद आती थी। उसके बाद वहां से लखनऊ आती थी। उसी रकम से काल सेंटर के कर्मचारियों को वेतन, इमारत का किराया और अन्य खर्च किए जाते थे। पुलिस को प्राथमिक जांच में अबतक गिरोह का कोई बैंक खाता नहीं मिला है। जेल भेजने की देते थे धमकी पुलिस उपायुक्त उत्तरी अमित आनंद के मुताबिक, जालसाज करीब 100 से 200 अमेरिकन को उनके इलेक्ट्रानिक गैजेट्स पर वायरस आने, हैक होने और अन्य समस्याओं का हवाला देकर पॉपअप मैसेज भेजते थे। उसमें से 40 से 50 के फोन मैसेज में दिए गए नंबर पर वापस आते थे। जालसाज अल्ट्रा वीवर जैसे रिमोट-एक्सेस सॉफ्टवेयर के माध्यम से उनके कंप्यूटर, मोबाइल का रिमोट एक्सेस प्राप्त कर लेते थे। इसके बाद ठग अमेरिकी नागरिकों को जाल में फंसाकर चाइल्ड पोर्नोग्राफी, ड्रग स्मगलिंग आदि से संबंधित आपत्तिजनक/अवैध गतिविधियों के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। यह कहकर तीन चरणों में टीमें बात करती थी। जेल भेजने की धमकी देते थे। खुद को यूएसए की सुरक्षा एजेंसी का अफसर बताकर जांच करने का दावा करता। धमकाकर और बरगला कर मामला सेटल कराने का झांसा देकर गिफ्ट कार्ड, क्रिप्टो और हवाला के जरिए ठगी की रकम मंगाते थे। गुजरात से आपरेट होता था नेटवर्क पकड़े गए 16 जालसाज पश्चिम बंगाल और गुजरात के है जबकि एक लखनऊ का रहने वाला है। गिरोह का इंडिया हेड गुजरात से पूरे नेटवर्क आपरेट करता है। इसके अलावा गिरोह के कुछ सदस्य अमेरिका में भी हैं। जालसाजों से मिले इलेक्ट्रानिक गैजेट्स की पड़ताल फोरेंसिक टीम कर रही है। टीमें उसका डेटा रिकवर कर रही हैं। इसके अलावा गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटा रही हैं। गिरोह की मनी ट्रेल का ब्योरा भी जुटाया जा रहा है। ये भी पढ़ें: लखनऊ में नकली नोटों के रैकेट का पर्दाफाश, दो भाई गिरफ्तार